Mahabharata Adi Parva Shloka 1112
Shloka (श्लोक)
युष्मान संबॊधयाम्य एष यथा स न हरेद बलात
अतुलं हि बलं तस्य बृहस्पतिर उवाच मे
⚡ Quick Meaning
यह श्लोक दर्शाता है कि बृहस्पति शक्ति की परिभाषा पेश करता है, जो संजीवनी से भी अधिक है।
📖 Translations
English Translation
The speaker invokes attention, describing the incomparable strength of a certain entity, emphasizing how it cannot be forcibly taken away, indicating divine determination in retaining power.
हिंदी अनुवाद
वक्ता ध्यान आकर्षित करता है, एक विशेष वस्तु की अतुलनीय शक्ति का वर्णन करता है, इस पर जोर देते हुए कि इसे बलात नहीं लिया जा सकता, जो शक्ति बनाए रखने में दिव्य दृढ़ता को दर्शाता है।
🔍 Commentary
📜 Context
यह श्लोक आदिपर्व के श्लोक 1113 में है, जो शक्तियों के संदर्भ में महान बातें करता है।
🧘 Meaning
इस श्लोक का अर्थ स्पष्ट है कि कुछ शक्तियाँ अद्वितीय हैं और उनकी मजबूती को नकारा नहीं किया जा सकता।
🌟 Application
यह हमें सिखाता है कि कुछ चीजें अद्वितीय होती हैं, और उनका सम्मान करना चाहिए, खासकर जब वे विशेष शक्तियों का प्रतीक होती हैं।
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