Mahabharata Adi Parva Shloka 5806
Shloka (श्लोक)
पुरॊहितः सॊमकानां मन्त्रविद बराह्मणः शुचिः
परिस्तीर्य जुहावाग्निम आज्येन विधिना तदा
⚡ Quick Meaning
एक ब्राह्मण, जो सोमक से संबंधित है, यज्ञ अग्नि में विधिपूर्वक घी अर्पित करता है।
📖 Translations
English Translation
A priest, versed in mantras and pure, related to the Somakas, properly placed offerings and poured ghee into the sacrificial fire according to the rituals.
हिंदी अनुवाद
एक ब्राह्मण, जो मन्त्रों का ज्ञाता और पवित्र था, सोमक समुदाय से संबंधित था, उसने विधि के अनुसार यज्ञ अग्नि में घी अर्पित किया।
🔍 Commentary
📜 Context
यह श्लोक यज्ञ की पवित्रता और सही विधियों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर देता है।
🧘 Meaning
यह श्लोक धार्मिक अनुष्ठानों के महत्व को व्यक्त करता है, जो समाज में शुद्धता और समर्पण के प्रतीक हैं।
🌟 Application
व्यक्तिगत जीवन में विधिपूर्वक कार्य करने से सफलता प्राप्त होती है, इसका अनुसरण होना चाहिए।
