Mahabharata Vana Parva – सा विग्रहवतीव शरीर वयवर्धत नृपात्मजा
Shloka (श्लोक)
सा विग्रहवतीव शरीर वयवर्धत नृपात्मजा
कालेन चापि सा कन्या यौवनस्था बभूव ह
⚡ Quick Meaning
सावित्री एक युवा राजकुमारी के रूप में समय के साथ विकसित हुई।
Translations
English Translation
The daughter of the king flourished like a beautiful maiden, gradually blossoming into her youth over time. Her physical form captured the essence of grace and beauty, symbolizing the transition from childhood to womanhood.
हिंदी अनुवाद
राजा की बेटी एक सुन्दर कन्या की तरह विकसित हुई, जो धीरे-धीरे अपने यौवन में आ गई। उसके शारीरिक रूप ने सुंदरता औरGrace का प्रतीक बना दिया, जो बचपन से महिला बनने के संक्रमण को दर्शाता है।
Commentary
Context
यह श्लोक सावित्री की युवावस्था की सुंदरता और विकास को उजागर करता है, जो महाभारत के वना पर्व में व्याख्या किया गया है।
Meaning
सावित्री का ये रूप विकास का प्रतीक है, जिसमें वह समय के साथ परिपक्व होती हैं। यह जीवन के विभिन्न चरणों को पहचानने का संदेश भी देता है।
Application
इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि समय के साथ अपने विकास का स्वागत करना और अपने गुणों को निखारना आवश्यक है।
