Atharvaveda Kaanda 11 Sukta 3 Mantra 1

Sanskrit Verse
(१)
१-३१ अथर्वा। ओदनः (बार्हस्पत्यौदनः।) ( त्रयः पर्याया)। १, १४ आसुरी गायत्री, २ त्रिपदा समविषमा गायत्री, ३, ६, १० आसुरी पङ्क्तिः, ४, ८ साम्न्यनुष्टुप्, ५, १३, १५, २५ साम्न्युष्णिक्, ७, १९-२२ प्राजापत्याऽनुष्टुप्, ९, १७-१८ आसुर्यनुष्टुप्, ११ भुरिगार्च्नुष्टुप्, १२ याजुषी जगती, १६ २३ आसुरी बृहती, २४ त्रिपदा प्राजापत्या बृहती, २६ आर्च्युष्णिक्, २७-२९ साम्नी बृहती, (२८-२९ भुरिक्), ३० याजुषी त्रिष्टुप्, ३१ अल्पशः पङ्क्तिरुत याजुषी।
तस्यौ॑द॒नस्य॒ बृहस्पतिः॒ शिरो॒ ब्रह्म॒ मुख॑म्
English Translation
This mantra talks about the power of food and nourishment. It connects with the divine energy for strength and wisdom.
Hindi Translation / हिंदी अनुवाद
यह मंत्र भोजन और पोषण की शक्ति के बारे में है। यह ताकत और ज्ञान के लिए दिव्य ऊर्जा से जुड़ता है।
Spiritual Significance / आध्यात्मिक महत्व
English
This mantra reminds us to appreciate the food we receive. It shows that nourishing our body can also nourish our spirit.
Hindi
यह मंत्र हमें मिलने वाले भोजन की सराहना करने की याद दिलाता है। यह दिखाता है कि हमारे शरीर का पोषण हमारे आत्मा को भी पोषण देता है।
Practical Application / व्यावहारिक उपयोग
English
You can recite this mantra before meals to express gratitude. It helps in focusing on the nourishment you receive.
Hindi
आप भोजन से पहले इस मंत्र का जाप कर सकते हैं ताकि आभार प्रकट कर सकें। यह आपको मिलने वाले पोषण पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
