Mahabharata Udyoga Parva – एवम अस्त्व इति तं पराह परह्रादॊ विस्मितस तदा

Shloka (श्लोक)
एवम अस्त्व इति तं पराह परह्रादॊ विस्मितस तदा
उपाकृत्य तु विप्राय वरं दुःखान्वितॊ ऽभवत
⚡ Quick Meaning
परह्राद ने राजा से कहा कि उसके वर की स्वीकृति से उसके हर्ष और भय दोनों में वृद्धि हुई है।
Translations
English Translation
Pleased by the affirmation from the king, Prahlada acknowledges both joy and dread. His acceptance of the boon is marked by a mix of happiness and the burden of responsibility it brings, illustrating the duality of blessings.
हिंदी अनुवाद
राजा की स्वीकृति से प्रसन्न होकर, परह्राद ने खुशी और भय दोनों को स्वीकार किया। वर की स्वीकृति एक जिम्मेदारी का बोझ भी लाती है।
Commentary
Context
यह पंक्ति वेदना या दुःख के साथ वर की स्वीकृति को दर्शाती है, जो शांति पर्व का हिस्सा है।
Meaning
यह श्लोक यह दर्शाता है कि वर प्राप्त करना केवल खुशी का अनुभव नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है।
Application
यह सबक है कि जब भी हम वर या अवसर प्राप्त करते हैं, हमें उस पर ध्यान देना चाहिए और उसकी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
