Mahabharata Vana Parva – इच्छेयम अभ्यनुज्ञातुम आर्यया शवशुरेण च
Shloka (श्लोक)
इच्छेयम अभ्यनुज्ञातुम आर्यया शवशुरेण च
अनेन सह निर्गन्तुं न हि मे विरहः कषमः
⚡ Quick Meaning
सावित्री अपने परिवार से अनुमति मांगती हैं कि वह अपने पति के साथ जाने के लिए सहमत हैं।
Translations
English Translation
Savitri expresses her desire to receive permission from her in-laws to accompany her husband. She asserts that she cannot tolerate the separation from him, emphasizing the bond and commitment they share.
हिंदी अनुवाद
सावित्री अपने सास-ससुर से अनुमति मांगती हैं कि वह अपने पति के साथ जाना चाहती हैं। वह यह बताती हैं कि अपने पति से अलग होना असंभव है, जो उनके स्नेह और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
Commentary
Context
यह श्लोक पारिवारिक संतुलन और अनुमति की बढ़ती प्रथा को दर्शाता है, जब सावित्री अपने पति के साथ जाने की योजना बना रही हैं।
Meaning
यह श्लोक समझाता है कि पारिवारिक संबंधों का भी प्रेम और समर्पण में बड़ा महत्व है।
Application
यह हमें सिखाता है कि मजबूत रिश्ते को निभाने के लिए पारिवारिक अनुमति और सहयोग आवश्यक है।
