Mahabharata Vana Parva – उपवासान न मे गलानिर नास्ति चापि परिश्रमः
Shloka (श्लोक)
[सावित्री]उपवासान न मे गलानिर नास्ति चापि परिश्रमः
गमने च कृतॊत्साहां परतिषेद्धुं न मार्हसि
⚡ Quick Meaning
सावित्री अपने दृढ़ संकल्प और उत्साह का प्रदर्शन करती हैं, यह बताते हुए कि वह यात्रा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
Translations
English Translation
Savitri asserts that she does not feel any hindrance or exhaustion from fasting and is filled with enthusiasm for the journey ahead. She insists that there is no reason to prevent her from accompanying her husband, reflecting her strength and determination.
हिंदी अनुवाद
सावित्री कहती हैं कि वह उपवास से व्यथित नहीं हैं और यात्रा के लिए उसके पास काफी उत्साह है। वह अपने पति के साथ जाने से रोकने का कोई कारण नहीं मानतीं, जो उनकी शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन करता है।
Commentary
Context
यह श्लोक अत्यधिक समर्पण और बलिदान का प्रतीक है, जब सावित्री अपने पति के साथ यात्रा करने के अपने इरादे को व्यक्त कर रही हैं।
Meaning
यह श्लोक याद दिलाता है कि सच्चे प्यार और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता के लिए कठिनाइयों का न होना असंभव नहीं होता।
Application
यह आश्वासन देता है कि समस्याओं का सामना करते समय सकारात्मक दृष्टिकोण रखना आवश्यक है और परिस्थितियों से ऊपर उठना संभव है।
