Mahabharata Vana Parva – वनं न गतपूर्वं ते दुःखः पन्थाश च भामिनि
Shloka (श्लोक)
[सत्यवान]वनं न गतपूर्वं ते दुःखः पन्थाश च भामिनि
वरतॊपवासक्षामा च कथं पद्भ्यां गमिष्यसि
⚡ Quick Meaning
सत्यवान अपनी पत्नी से दुख और कठिनाइयों के बारे में चिंतित हैं।
Translations
English Translation
Satyavan expresses his concerns about the trials of the journey they are about to take into the forest, questioning how Savitri can manage such challenges when he feels unprepared and burdened with worries.
हिंदी अनुवाद
सत्यवान अपनी पत्नी से यात्रा के दौरान आने वाली कठिनाइयों के बारे में चिंतित हैं, यह सवाल उठाते हैं कि सावित्री कैसे इन चुनौतियों का सामना करेंगी जब वह स्वयं को असमर्थ और परेशान समझते हैं।
Commentary
Context
यह श्लोक विवाह और साझेदारी के बीच की परंपरा और चुनौतियों को दर्शाता है, जब सत्यवान अपनी पत्नी से बात कर रहे हैं।
Meaning
यह श्लोक दिखाता है कि जब कोई व्यक्ति संकट में होता है, तो अपने प्रियजनों के साथ होने से मजबूत समर्थित अनुभव होता है।
Application
यह हमें यह सिखाता है कि जीवन के कठिन मौकों पर एक-दूसरे का सहयोग और समर्थन महत्वपूर्ण है।
