MahabharataVana Parva
Mahabharata Vana Parva – कीचकॊ ऽथ गृहं गत्वा भृशं हर्षपरिप्लुतः
Shloka (श्लोक)
कीचकॊ ऽथ गृहं गत्वा भृशं हर्षपरिप्लुतः
सैरन्ध्री रूपिणं मूढॊ मृत्युं तं नावबुद्धवान
⚡ Quick Meaning
कीचकों ने नंदिनी को रूप में देखकर उसकी इच्छा को भुला दिया।
Translations
English Translation
Upon reaching home, intoxicated with joy, the foolish Keechaka failed to recognize the deadly fate that awaited him, having been mesmerized by the beauty of Sairandhri.
हिंदी अनुवाद
घर पहुंचकर, हर्ष से भरा हुआ कीचक नंदिनी की सुंदरता से मोहित हो गया और उसे मृत्यु का पता नहीं चला।
Commentary
Context
यह श्लोक उस समय का वर्णन करता है जब कीचक नंदिनी की सुंदरता के चलते अपने अंत के बारे में अनभिज्ञ था।
Meaning
इस श्लोक में यह दर्शाया गया है कि मोहन की शक्ति व्यक्ति को विवेक से वंचित कर सकती है।
Application
हमें इस श्लोक से यह सीखने को मिलता है कि मोह के चलते विवेक का ह्रास निंदनीय होता है।
