Mahabharata Vana Parva – तम उन्मथ्य सुशर्मा तु रुदतीं वधुकाम इव
Shloka (श्लोक)
तम उन्मथ्य सुशर्मा तु रुदतीं वधुकाम इव
सयन्दनं सवं समारॊप्य परययौ शीघ्रवाहनः
⚡ Quick Meaning
अर्जुन ने सुशर्मा को हराने के लिए शीघ्रता दिखाई।
Translations
English Translation
Arjun, embodying agility and strategy, swiftly prepared to challenge and conquer Su-sharma, a daunting adversary who was in lamentation. His readiness highlighted the essence of quick action amidst the chaos of battle.
हिंदी अनुवाद
अर्जुन, जो गति और रणनीति का प्रतीक है, ने सुशर्मा, एक कठिन प्रतिद्वंद्वी, को चुनौती देने के लिए तेजी से तैयारी की। उसकी तत्परता संघर्ष के उथल-पुथल के बीच त्वरित कार्रवाई का महत्व दर्शाती है।
Commentary
Context
यह श्लोक विराट पर्व में आता है, जहाँ अर्जुन ने यह तय किया कि वह अपने शत्रुओं का सामना करेगा।
Meaning
इस श्लोक से हमें यह सीख मिलती है कि कठिनाइयों में त्वरित निर्णय लेना आवश्यक होता है।
Application
इस श्लोक का महत्व हमें यह सिखाता है कि संघर्ष के समय में लचीला रहना महत्वपूर्ण है।
