Mahabharata Vana Parva – तां तु पद्मपलाशाक्षीं जवलन्तीम इव तेजसा
Shloka (श्लोक)
तां तु पद्मपलाशाक्षीं जवलन्तीम इव तेजसा
न कश चिद वरयाम आस तेजसा परतिवारितः
⚡ Quick Meaning
उसके तेज से सभी का ध्यान उसकी ओर आकर्षित हुआ, और वह अत्यंत सुंदर दिखी।
Translations
English Translation
Radiant like the fiery flower, Savitri’s splendor captivated all. Her brilliance was so overwhelming that none could resist being drawn to her, representing a blend of beauty and divine grace.
हिंदी अनुवाद
ज्वालामुखी की तरह तेजस्वी, सावित्री की आभा ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उसकी चमक इतनी प्रबल थी कि कोई भी उसे देखने से विमुख नहीं होता, जो सुंदरता और दिव्यता का मिश्रण प्रस्तुत करती है।
Commentary
Context
यह श्लोक सावित्री के अद्वितीय व्यक्तित्व और उनकी तेजस्विता को दर्शाता है, जो सभी को मोहित कर देती है।
Meaning
यह श्लोक व्यक्तित्व की एक शक्तिशाली उपस्थिति की पहचान कराता है, जिसमें अविस्मरणीय प्रभाव और आकर्षण होता है।
Application
सावित्री की यह विशेषता सिखाती है कि हमारे भीतर की आभा और गुण ही हमें दूसरों के बीच में अलग बनाते हैं।
