Mahabharata Vana Parva – सावित्री तव आह भर्तारं नैकस तवं गन्तुम अर्हसि
Shloka (श्लोक)
सावित्री तव आह भर्तारं नैकस तवं गन्तुम अर्हसि
सह तवयागमिष्यामि न हि तवां हातुम उत्सहे
⚡ Quick Meaning
सावित्री अपने पति को वे साहित्य देती है कि वह अकेले यात्रा करने में सक्षम है।
Translations
English Translation
Savitri informs her husband that he is fit to travel alone. She states firmly that she will accompany him and expresses her inability to part with him, showcasing her devotion and commitment.
हिंदी अनुवाद
सावित्री अपने पति से कहती हैं कि वह अकेले यात्रा करने के योग्य हैं। वह दृढ़ता से बताती हैं कि वह उनके साथ जाएंगी और उन्हें छोड़ने में असमर्थता व्यक्त करती हैं, जो उनके समर्पण और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
Commentary
Context
यह श्लोक वन पर्व में सावित्री का अपने पति सत्यवान के प्रति अटूट प्रेम और समर्थन को बताता है जब वे वन की ओर जाते हैं।
Meaning
यह श्लोक सावित्री की भक्ति और समर्पण को दर्शाता है, जो यह दर्शाता है कि प्रेम में एक साथी की यात्रा हमेशा साझा होती है।
Application
इस श्लोक से हमें यह सिखने को मिलता है कि जीवन की चुनौतियों में साथ रहना और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाना अति आवश्यक है।
