Mahabharata Adi Parva Shloka 8953
Shloka (श्लोक)
एवं वर्णस्य वर्णस्य समुच्चीय सहस्रशः
कषीरं पिबन्तस तिष्ठन्ति भुञ्जानाः शालितण्डुलान
⚡ Quick Meaning
वर्ण जातियों का समुच्चय और उनके संसाधनों का सेवन करना आवश्यक है।
📖 Translations
English Translation
This shloka expresses the unity of castes and the importance of sharing resources among them. It emphasizes collective consumption for prosperity.
हिंदी अनुवाद
यह श्लोक वर्णों के एकीकरण और उनके बीच संसाधनों के साझा करने के महत्व को व्यक्त करता है। यह समृद्धि के लिए सामूहिक भोग पर जोर देता है।
🔍 Commentary
📜 Context
यह श्लोक वर्ण व्यवस्था में एकता का प्रतीक है और कैसे सभी जातियों को मिलकर prosper करना चाहिए।
🧘 Meaning
यह जातियों के बीच सहयोग और एकता का संदेश देता है, यह दिखाते हुए कि कैसे एकता से ही सफलता मिल सकती है।
🌟 Application
संसाधनों का साझा उपयोग हमें शांति और सहयोग की ओर अग्रसर करता है। इसलिए समाज में एकता जरूरी है।
