Mahabharata Udyoga Parva – धृतराष्ट्रस तु तान सर्व्वान पश्यन दिव्येन चक्षुषा

Shloka (श्लोक)
धृतराष्ट्रस तु तान सर्व्वान पश्यन दिव्येन चक्षुषा
मुमुदे भरतश्रेष्ठ परसादात तस्य वै मुनेः
⚡ Quick Meaning
धृतराष्ट्र ने दिव्य दृष्टि से सभी को देखा और आनंदित हुए।
Translations
English Translation
Dhritarashtra, by the grace of the sage, obtained divine eyesight and joyfully perceived all those present. This moment reflects the transformation of perception and realization of truth and grace.
हिंदी अनुवाद
धृतराष्ट्र ने ऋषि के आशीर्वाद से दिव्य दृष्टि प्राप्त की और सभी उपस्थित लोगों को खुशी से देखा। यह क्षण दृष्टि और सत्य की समझ की परिवर्तनशीलता को दर्शाता है।
Commentary
Context
यह श्लोक धृतराष्ट्र की दृष्टि के परिवर्तन का वर्णन करता है, जो उन्हें सत्य देखने का अवसर प्रदान करता है।
Meaning
दिव्य दृष्टि प्राप्त करना केवल भौतिक जड़ता को पार करना नहीं है, बल्कि आत्मिक ज्ञान प्राप्त करना भी है।
Application
हमें अपने संज्ञान और दृष्टिकोण को विकसित करना चाहिए, ताकि हम सच्चाई को देख सकें।
