Mahabharata Udyoga Parva – स वत्सदन्तं संधाय जिह्मगानल संनिभम

Shloka (श्लोक)
स वत्सदन्तं संधाय जिह्मगानल संनिभम
आकृष्य राजन्न आकर्णाद विव्याधॊरसि सात्यकिम
⚡ Quick Meaning
सात्यकि ने जिह्वा के आग की तरह दृश्य वाले बाण से हमला किया।
Translations
English Translation
With the precision akin to a burning flame, Satyaki directed his shot towards the ear of Karna, proving not only his skill but also his focus amidst the chaos of war.
हिंदी अनुवाद
जिह्वा के आग के समान दृश्यता के साथ, सात्यकि ने कर्ण के कान की ओर अपने बाण को लक्षित किया, न केवल उसकी कौशलता को साबित करते हुए, बल्कि युद्ध की अराजकता के बीच उसकी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को भी।
Commentary
Context
यह श्लोक एक महत्वपूर्ण स्थिति का संकेत है जहां युद्ध में ध्यान और सटीकता की आवश्यकता थी।
Meaning
सात्यकि का यह कार्य इसका प्रतीक है कि सही लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने से सफलता प्राप्त की जा सकती है।
Application
संघर्ष के समय, अपने उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है, जिससे हम भीतर शक्ति पहचान सकें।
