Mahabharata Vana Parva – कथं हय अस्मद्विधॊ जातु जानन धर्मविनिश्चयम
Shloka (श्लोक)
कथं हय अस्मद्विधॊ जातु जानन धर्मविनिश्चयम
परहस्तगतां नारीं मुहूर्तम अपि धारयेत
⚡ Quick Meaning
राम ने कहा कि धर्म के अनुसार ऐसे किसी भी विचार को नकारना चाहिए।
Translations
English Translation
Rama reflects on the nature of dharma, pondering how an honorable man could even consider abandoning a woman of noble lineage for any reason, even momentarily. This highlights the sanctity of commitment.
हिंदी अनुवाद
राम इस पर विचार करते हैं कि एक सम्मानित आदमी किसी भी कारण से एक स्वाभिमानी नारी को छोड़ने के विषय में कैसे सोच सकता है, भले ही वह क्षणिक हो। यह त्याग की मात्रा को दर्शाता है।
Commentary
Context
यह श्लोक धर्म और सम्मान को प्राथमिकता देने का संदेश देता है, विशेष रूप से नारी के प्रति।
Meaning
यह श्लोक निष्कर्ष निकालता है कि संलग्नता का वैवाहिक धर्म शाश्वत होता है और इसे किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जाना चाहिए।
Application
हमें अपने रिश्तों में निष्ठा और प्रतीकात्मकता को बनाए रखना चाहिए और कभी भी सच्चे संबंधों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
