Mahabharata Vana Parva – गुर्व अग्निहॊत्रार्थ कृते परस्थितश च सुतस तव
Shloka (श्लोक)
गुर्व अग्निहॊत्रार्थ कृते परस्थितश च सुतस तव
न निवार्यॊ निवार्यः सयाद अन्यथा परस्थितॊ वनम
⚡ Quick Meaning
यह श्लोक सावित्री की तपस्या के महत्व को बताता है जब वह अपने पति की यात्रा के वक्त तप कर रही हैं।
Translations
English Translation
This verse emphasizes the significance of Savitri’s prayers and efforts as she stands firm for the sake of her husband and the rituals. It illustrates that no one can impede their journey otherwise, affirming their resolve to proceed into the forest.
हिंदी अनुवाद
यह श्लोक सावित्री की प्रार्थनाओं और प्रयासों के महत्व को दर्शाता है जब वह अपने पति और अनुष्ठानों के लिए स्थिर रहती हैं। यह अनुशासन को दर्शाता है कि कोई भी उनकी यात्रा में बाधा डाल नहीं सकता।
Commentary
Context
यह श्लोक सावित्री की दृढ़ता और भक्ति का सांकेतिक रूप से वर्णन करता है, जो अपने पति के लिए संकोच नहीं करती।
Meaning
यह दर्शाता है कि अपने प्रियजनों के लिए निस्वार्थ तपस्या और त्याग का महत्व है।
Application
इससे हम प्रेरित होते हैं कि कठिनाइयों के बावजूद, अपने लक्ष्यों और प्रियजनों के प्रति समर्पण बनाए रखना चाहिए।
